घनानन्द "घन्ना भैजी" उत्तराखण्ड के एक जाने पहचाने अभिनेता हैं. हम और आप उन्हें दर्जनों गानों और कई फिल्मों में देख चुके हैं. कौन भूल सकता है "सरा-रा रा प्वां प्वां" के कंडक्टर को और घन्ना भाई एम.बी.बी.एस. में उनके दमदार अभिनय को. मंच पर उनके द्वारा किये जाने वाले हास्य- व्यंग के प्रोग्राम बहुत लोकप्रिय हैं.
"क्रिएटिव उत्तराखण्ड - म्योर पहाड" के आशीष ध्यानी से घन्ना भैजी ने लंबी वार्ता की.पेश है उसी वार्ता के कुछ अंश-
प्रश्न- घन्ना भैजी!! कृपया अपने बारे में हमें कुछ बतायें?
उत्तर- मेरा जन्म लैंसडान में हुआ वहां से थोडी दूरी पर जयहरिखाल इन्टर कालिज से मेरी पढाई हुई फिर सरकारी नौकरी शुरू की. अभी में अभिनय के साथ ही वन विभाग में ए.डी.ओ. के पद पर काम भी करता हूँ.
प्रश्न- अपने परिवार के बारे में हमें बतायें?
उत्तर- परिवार में 3 भाई हैं. तीनों भाई कलाकार हैं. मेरे 3 बेटे हैं जिनमें से 2 इंजीनियरिंग कर रहे हैं.
प्रश्न- बचपन की कोई घटना जो बार-बार याद आती है
उत्तर- बचपन से मेरी कला में बहुत ज्यादा रुचि थी. स्कूल के दिनों में भी रामलीला में भाग लेता था. एक बार की घटना याद है, कि मुझे रामलीला में बन्दर का रोल मिला गया. बाकि और बन्दरों के साथ शरारत करने में मेरी दाढी निकल गयी. निर्देशक ने हमें रामलीला से निकाल दिया. पर मैने कभी भी हार नही मानी.
मुझे एक्टिंग सीखने का इतना शौक था कि मैने "हनीमून" फिल्म की शूटिंग के दौरान गढवाल में हेल्पर का भी काम किया.
प्रश्न- आपके कैरियर के कुछ निर्णायक पल या मील के पत्थर क्या है?
उत्तर- मैने आकाशवाणी लखनऊ द्वारा आयोजित 1972 की स्वर परीक्षा में भाग लिया. उसके बाद कई कार्यक्रमों में भागीदारी की. लखनऊ आकाशवाणी केन्द्र द्वारा आयोजित उत्तरायण कार्यक्रम से मुझे बहुत प्रशंसा मिली. लखनऊ दूरदर्शन केन्द्र से प्रसारित कार्यक्रम में भी मैने काफी काम किया. घरजवैं फिल्म के लिए मुझे मुम्बई बुलाया गया. मेरा फिल्म में सिर्फ 7 मिनट का रोल हैं, पर मैने ये थोडी देर का किरदार बखूबी निभाया. ये फिल्म बहुत हिट हुई और मेरे काम को भी बहुत भौत प्रशंसा मिली. ये फिल्म मेरे कैरियर का मील का पत्थर साबित हुई.
प्रश्न- घन्ना भैजी!! आप सरकारी नौकरी में हैं. आपके कैरियर में सरकारी नौकरी कोई बाधा तो नहीं डालती?
उत्तर- सरकारी नौकरी करने से कैरियर में बाधा तो आती ही है. सरकारी नौकरी के कारण कभी-2 छुट्टी की समस्या आती है. विदेशों में शो करने के भी प्रस्ताव मिले पर NOC की समस्या आयी, इस कारण देश-विदेश में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मौका छूट जाता है.
पर हमारे क्षेत्र मे कलाकारो के लिये धन की कमी है. सिर्फ कला के भरोसे परिवार नहीं चलता. इस क्षेत्र में आर्थिक लाभ तो म्यूजिक कंपनी वालों को होता है.
प्रश्न- आप कुमाऊनी और गढवाली बोली की आम बोलचाल में क्या अन्तर सोचते हैं?
उत्तर- कुमाऊनी और गढवाली बोली में ज्यादा अन्तर नहीं है. ध्यान से सुनने पर दोनों बोलियां आराम से समझ में आ जाती हैं, यदि आपको कोई एक भी बोली आती है तो.
तीन साल पहले मुझे बागेश्वर में एक शो करने का मौका मिला. लोग कुमाऊनी में प्रोग्राम देने को बोलने लगे. मैने कहा कि आप लोग अगर ध्यान से सुनेंगे तो मैं आपको गढवाली में बोलकर भी हंसा दूंगा. अन्त में उस प्रोग्राम की सब लोगों ने काफी तारीफ की.
प्रश्न- आजकल तो टी.वी. पर हास्य कलाकारों को मंच देने वाले कई कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं. आप ने कभी उनमें भाग लेने के बारे में नहीं सोचा?
उत्तर- कभी नौकरी और कभी पारिवारिक समस्याओं के कारण इन में भाग नहीं ले पाया. मेरे एक मित्र रजनीश अग्निहोत्री जी ने बम्बई से "लाफ्टर चैलेंज" हेतु रिकार्डिंग भेजने के लिए कई बार मुझे आग्रह किया, लेकिन कुछ मजबूरियों के कारण मेरे लिए यह संभव नहीं हो पाया. अगर भगवान ने चाहा तो इस तरह के कार्यक्रम में भविष्य में आप मुझे जरूर देखेंगे.
प्रश्न- आपके पसंदीदा गायक व गायिका?
उत्तर- पसंदीदा गायक नरेन्द्र सिंह नेगी हैं. गायिका अनुराधा निराला जी हैं.
प्रश्न- युवा कलाकारों के लिए कुछ संदेश?
उत्तर- पहाडों कि संस्कृति बचाने के लिए युवा कलाकारों को आगे आना चाहिये. उत्तराखण्ड संगीत में अब युवा कलाकारों के लिए काफी संभावनाए हैं. |